Saturday, December 25, 2010

आपकी अमानत (आपकी सेवा में)

पुस्‍तकः आपकी अमानत (आपकी सेवा में) मौलाना मुहम्मद क़लीम सिद्दीक़ी
दो शब्द
यदि आग की एक छोटी सी चिंगारी आपके सामने पड़ी हो और एक अबोध बच्चा सामने से नंगे पाँव आ रहा हो और उसका नन्हा सा पाँव सीधे आग पर पड़ने जा रहा हो तो आप क्या करेंगे?आप तुरन्त उस बच्चे को गोद में उठा लेंगे और आग से दूर खड़ा करके आप अपार प्रसन्नता का अनुभव करेंगें।इसी प्रकार यदि कोई मनुष्य आग में झुलस जाये या जल जाये तो आप तड़प जाते हैं और उसके प्रति आपके दिल में सहानुभूति पैदा हो जाती है।क्या आपने कभी सोचा अखिर ऐसा क्यों है? इसलिए कि समस्त मानव समाज केवल एक मातृ-पिता की संतान है और हर एक के सीने में एक धड़कता हुआ दिल है जिसमें प्रेम है हमदर्दी है और सहानुभूति है वह एक दूसरे के दुःख सुख मे तड़पता है और एक दूसरे की मदद करके प्रसन्न होता है। इसलिए सच्चा इन्सान और मानव वही है जिसके सीने में पूरी मानवता के लिए प्रेम उबलता हो, जिसका हर कार्य मानवता की सेवा के लिए हो और जो हर एक को दुःख दर्द मे देखकर तड़प जाए और उसकी मदद उसके जीवन का अटूट अंग बन जाए।इस संसार में मनुष्य का यह जीवन अस्थाई है, और मरने के बाद उसे एक और जीवन मिलेगा जो स्थाई होगा। अपने सच्चे मालिक की उपासना, और केवल उसी की माने बिना मरने के बाद के जीवन में स्वर्ग प्राप्त नहीं हो सकता और सदा के लिए नरक का ईंधन बनना पड़ेगा।आज लाखों करोड़ो आदमी नरक का ईधन बनने की होड़ में लगे हुए हैं और ऐसे मार्ग पर चल रहे हैं जो सीधे नरक की ओर जाता है। इस वातावरण में उन तमाम लोगों का दायित्व है जो मानव समूह से प्रेम करते हैं और मानवता में आस्था रखते हैं कि वे आगे आयें और नरक में गिर रहें इंसानों को बचाने का अपना कर्तव्य पूरा करें।हमें खुशी है कि मानव जाति से सच्ची सहानुभूति रखने वाले और उनको नरक की आग से बचा लेने के दुख में घुलने वाले मौलाना मुहम्मद कलीम सिद्दी़क़ी ने प्रेम और स्नेह के कुछ फूल प्रस्तुत किये हैं जिसमें मानवता के प्रति उनका पे्रम साफ़ झलकता है और इसके माध्यम से उन्होंने वह कर्तव्य पूरा किया है जो एक सच्चे मुसलमान होने के नाते हम सब पर है।इन शब्दों के साथ दिल के ये टुकड़े और आप की अमानता आप के समक्ष प्रस्तुत है।

No comments: