कुछ लिखने से पहले अपना एक शेर कहना चाहता हूँ....
में कोई शायर नहीं के शेर सुनाऊं तुमको,
ये तो जज़्बात हैं जो दिल से निकल आते हैं !!
और ये भी कि ...
तेरी कोशिश जातां तेरा तो है "जमशेद" जी अच्छा,
मगर हर दिल में घर करना बड़ा दुश्वार होता है!!
------------------------
ताज के बारे मैं कब से सुनता और पढता आया हूँ और कब से सोच रहा था के मैं भी ताज को लेकर कुछ लिखूं आज इस ब्लॉग पे अपनी फीलिंग लिख रहा हूँ...
तुम्हारे सामने इस 'ताज' की तारीफ क्या करूँ,
मेरा तो ताज भी तुम हो, मेरी मुमताज़ भी तुम,
तुम्हारे सामने ग़ज़ल किसी की क्या गाऊँ,
मेरा तो गीत भी तुम हो, मेरा तो साज़ भी तुम,
मुझे क्या हो गया ये राज़ कोई क्या जाने,
मेरा तो राज़ भी तुम हो, मेरे हमराज़ भी तुम,
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
.jpg)
1 comment:
aapki shayri aur rachna dono pasand aayi. par aapne likha aap rachna taj par likh rahe hai par sach kahta hun mujhe nahi laga ye rachna taj par thi. taj ki comprision aap kisi aur se kar rahe the...
waise aapki lekhni achhi hai... keep writing...
baat chubhi ho to maafi chahunga...
Post a Comment